Tuesday, 8 January 2019

स्टीफ़ेन हॉकिंस के जन्मदिन पर !!!

फ़िज़िक्स की क्लास चल रही थी ।ब्लैक होल की कहानी शुरू हुई ।उस कहानी से एक नाम जुड़ा”स्टीफ़ेन हॉकिंस “।
हमलोगो ब्लैक होल के जादू में अटके थे ,”बातें कर रहे थे कि क्या सच में ऐसी कोई जगह है ,जहाँ जाकर वापस ना आया जा सके ।कैसा होगा क्षितिज का मंज़र?
तभी एक लड़के ने कहा “सर मर के भी तो वापस नही आ सकते ,और क्लास ठहाकों से भर गया ।मास्टर साहब भी हँसी के  गुरुत्वाकर्षण में फँस गए ।
उस दिन पहली बार मुझे स्टीफ़ेन हॉकिंस के बारे में जानकारी मिली ।अभी आश्चर्य के जाल से निकली भी ना थी कि ,मालूम हुआ हॉकिंस साहब को एक ऐसी बीमारी है ,जिसकी वजह से वो ना चल सकते है ना बोल सकते है ।उनके शरीर का अधिकांश भाग निष्क्रिय है ।सिर्फ़ अपने दिमाग़ और हाथ कि कुछ उँगलियों से चमत्कार कर रहे है ,फ़िज़िक्स के क्षेत्र में ।उस दिन से कई दिन तक इनके बारे में सोचती रही ।
फिर कुछ सालों बाद उनके ऊपर बनी एक डॉक्युमेंट्री देखी ।उसके बाद कही न्यू में पढ़ा कि उनकी नर्स उनको पीड़ित करती है ।इसके बाद उनको भूल सी गई ।

उनको याद दिलाती एक फ़िल्म आई “द थियरी आउफ़ एवरीथिंग “देख कर कई बार रोई ।सिनेमा हॉल से बाहर आने पर शतेश राम से कई बातों पर चर्चा हुई ।कुछ विज्ञान कि तो कुछ इनके प्रेम की तो कुछ अपने ।
पर बात वहीं है ,फ़िल्म तो फ़िल्म होती है ।बाद में गूगल से मालूम हुआ कि उनका पारिवारिक जीवन इतना आसान नही था ।सच में हो भी कैसे सकता है ।बड़ी सहनशीलता चाहिए ।जितने साल भी उनकी पत्नी उनके साथ रही ,सच में वे साल सहस और प्रेम का हीं उदाहरण है ।फिर एक नर्स के लिए पत्नी को छोड़ना और नर्स से प्रताड़ित होना ये भी एक अलग प्रेम हीं था ।

इन सबसे अलग ये फ़िल्म इतनी ख़ूबसूरत ढंग से बनाई गई है कि आपको इसके हर चीज़ से प्यार हो जाएगा ।सच में कल्पनाओं वाला प्रेम अद्भुत हीं होता है ।स्टीफ़ेन के रोल में “एडी रेडमेन “ में बहुत हीं अच्छा काम किया है ।कई बार फ़िल्म देखते हुए आप फ़िज़िक्स भूल जातें है ।रह जाता है तो सिर्फ़ प्रेम।
#स्टीफ़ेन हॉकिंस के जन्मदिन पर ।

Monday, 7 January 2019

शैतान !!!!

आज मैं आपसबको ख़लील जिब्रान की एक कहानी सुनाती हूँ। एक ऐसी कहानी ,जो मुझे लगता है हर परिवेश पर लागू हो सकती है।
कहानी शुरू होती है “लेबनान के एक पादरी से ।”पादरी गाँव -गाँव घूम कर धर्म का उपदेश देता है ।लोगों को शैतान के जाल से बचने का रास्ता बताता है ।लोग भी उसकी बात बड़ी श्रद्धा से सुनते है।इसके एवज में अपनी शक्तिअनुसार धन -अन्न,फल मूल पादरी को दे देते है।
ठंड की एक शाम पादरी ,एक गाँव कि तरफ़ जा रहा होता है ।पहाड़ियों -घाटियों को पार करते हुए वो चला जा रहा है ,तभी उसे किसी की चीख़ सुनाई देती ।रुक कर वो ,चीख़ आती खाई कि तरफ़ देखता है।उसे वहाँ एक व्यक्ति ख़ून से लतपथ ,नंग -धडग अवस्था में दिखता है ।पादरी से सहयता और जीवन बचाने की गुहार लगाता है।पादरी को लगता है कि ,यह व्यक्ति राहगीरों को लूटने वाला लुटेरा हो सकता है ।लगता है लूट के दौरान हाथ पाई हुई और ये मरने की अवस्था में पहुँच गया है ।अगर किसी ने मुझे इसके पास देख लिया तो इसकी मृत्यु का कारण मुझे हीं समझेंगे ,ये सोच कर पादरी उसकी सहयता किए बिना जाने लगा ।

पादरी कुछ क़दम आगे गए होंगे कि उन्हें फिर से उस मरणसन्न व्यक्ति की करूण आवाज़ सुनाई दी ,”रुको पादरी ।हम दोंनो गहरे मित्र हैं।मेरे पास आओ मेरी मदद करो ।”
पादरी सोच में पड़ गया ।वो घायल व्यक्ति के पास जाकर फिर से उसे ठीक से देखता है ।उस व्यक्ति में उसे कपट,कुरूपता ,नम्रता और बुद्धिमता का मिश्रण देख वो पूछ ,”तुम बहुत धूर्त हो ।मैं तुम्हें पहले कभी नही देखा ।”

पीड़ित व्यक्ति ने दर्द भरे स्वर में कहा ,”तुमने मुझे हज़ार बार देखा है ।तुम मेरे बारे में रोज बात करते हो ।तुम मुझे अपने जीवन से भी अधिक प्रेम करते हो ।”
पादरी क्रोधित हो गया ,बोला अगर तुमने अभी सच नही बताया तो मैं इसी क्षण तुम्हें छोड़ कर चला जाऊँगा ।

घायल व्यक्ति एक कुटिल मुस्कान के साथ बोला “मैं शैतान हूँ ।”
पादरी काँप उठा ।उसका भयानक रूप देख कर बोले “तेरी इस घृणित छवि का ईश्वर अंत कर दे सदा के लिए ।”

शैतान कराह कर बोला ,”तुम नही जानते तुम क्या कह रहे हो “ये बात मैं बाद में बताऊँगा पहले अपनी हालत के बारे में बता दूँ ।मैं इस सुनसान घाटी में घूम रहा था कि ,फरिश्तों ने मुझ पर हमला कर दिया ।यदि घालय होकर मैंने मरने का नाटक ना किया होता तो आज मेरी मृत्यु थी ।
पादरी उसको बात सुनकर ख़ुश हो रहा था ।शैतान ने फिर कहा “मेरी हार पर तुम ख़ुश हो रहे हो जबकि मैं सदैव हीं तुम्हारी सुख -शांति का स्त्रोत हूँ ।
“तुमने मेरे अस्तित्व के बहाने अपनी जीविका चलाते हो “मेरी सत्ता का भय दिखा कर तुमने निष्कपट लोगों से धन ऐंठा है ।”
***क्या तुम नही जानते कि मेरे अंत से तुम्हारा क्या होगा ?जब लोग जान जायेंगे कि शैतान का अंत हो गया ,तो वे तुमसे क्या लेंगे ?एक पादरी हो कर भी तुम यह नही सोच पाते कि केवल शैतान के अस्तित्व ने हीं तुम्हारे मंदिर का निर्माण किया है ।तुम मुझे मारता कैसे छोड़ सकते हो ,जबकि तुम्हारी सारी प्रतिष्ठा ,मंदिर ,घर जीविका मुझसे हीं है ।
मेरा अस्तित्व तो आदि काल से है ।”मनुष्य दो शक्तिशाली शक्तियों के बीच फँसा है ।एक जिसकी शरण में उसे जाना है ,दूसरा जिससे उसे लड़ना है ।”
मनुष्य कभी नही जान सका कि पूजा या निंदा का अर्थ क्या है ?वह तो ऐसी स्थिति में है कि गरमी में खिलता है ठंड में मुरझा जाता है ।मैं एक गूँगा तूफ़ान हूँ जो पुरुष के दिमाग़ और नारी के मन को झकझोर देता हूँ ।मुझसे राहत पाने के लिए वे मंदिर मठ का दौरा करने लगते है या फिर किसी बुरे स्थान पर जाकर मेरी आगे आत्म समर्पण कर देते है ।

भय की नीव पर खड़ा मैं हीं मठों,धर्मों का निर्माता हूँ ।मैं हीं आनंद ,लालसा ,भोग -विलास हूँ ।यदि मैं ना रहा तो विश्व से भय का अंत हो जाएगा ।फिर मनुष्य की सारी आकाँक्षायें भी ना होंगी ।जीवन नीरस ,खोखला हो जाएगा ।

क्या तुम चाहते हो पादरी मेरी मौत से मनुष्य जाति कि गति -इक्षाएँ भी मेरे साथ मर जाए ?ऐसा कह कर शैतान ने पादरी की तरफ़ अपनी बाँहेंफैला दी ।अब तुम पर है कि तुम मुझे मारता छोड़ जाओगे या मेरे घावों पर मरहम लगाओगे ।

पादरी व्याकुल हो कर कहा ,” मुझे माफ़ कर दो ।तुम्हारा जीवित रहना ज़रूरी है ।तुम नही रहे तो पाप ,लालच का अंत हो जाएगा ।लोग पूजा -अर्चना ,दया ,माफ़ी सब भूल जाएँगे ।
“तुम्हें जीवित रहना होगा कारण तुम्हारे जीवन हीं मनुष्यों के मुक्ति का द्वार है ।”
इसके साथ हीं पादरी ने शैतान को अपने कंधे पर उठा लिया ।उसकी बोझ से उनकी कमर झुकती जा रही है ।उनके होंठों पर शैतान के जीवन की प्रार्थना चल रही है ।

Wednesday, 5 December 2018

सफ़ेद रुई से हल्के !!!

कल ठीक इसी समय यहाँ बर्फ़ गिर रही थी ।ठंड में यहाँ बर्फ़ का गिरना कोई अद्भुत बात नही ।ऐसा भी नही था की कल इस मौसम का पहला बर्फ़ गिरा हो ,फिर भी मुझे कल कुछ अलग लग रहा था ।बर्फ़ के फ़ाहे जैसा मेरा मन भी उड़ रहा था ।
कोक स्टूडियो वाली प्ले लिस्ट लगा कर मैं घर के कुछ कामों में लग गई ।सत्यार्थ की सेवा के बाद ,नहाने गई ।बाथरूम का दरवाज़ा पीट-पीट कर सत्यार्थ शांत हो गया था ।मन में कई आशंकाओं की बीच जितनी जल्दी हो सका बाहर आती हूँ । आती हूँ तो ,सत्यार्थ खिड़की के पास खड़ा रेन -रेन कह रहा था ।मैं उसके पास गाई ,खिड़की से देखा तो बर्फ़ गिरने लगी थी ।मैंने उसे कहा ,रेन नही स्नो ।वो नो -नो करके सोफ़े के सिर पर चढ़ गया ।वहाँ से बाहर देखने लगा ।
मैं भी कुछ देर खड़ी हो गई ।

इधर कोक स्टूडियो से गाने “ मेंहदी हसन” जी के नम्बर तक पहुँच गये थे ।घर गूँज रहा है “रंजीश हीं सही .....
आचानक से इस गाने का बजना ,या जाने उनकी आवाज़ का जादू या मौसम ,मेरा मन बर्फ़ की तरह गिरने लगा ।बालों से कुछ बूँदे गर्दन पर गिरी या आँखो से मालूम ही नही चला ।

खिड़की के पीछे मैं बालों को सूखाने लगी और बाहर ,बर्फ़ घरों को ,पेड़ों को ,सड़कों को नम बना रहे थे ।उनकी सफ़ेद नमी कितनी सुंदर लग रही थी ,इधर मेरे बालों की नमी ,नीले टी शर्ट पर चकता बना रहे थे ।

मन कर रहा था छोड़ दूँ आपने क़तरे -बिखरे गीले बालों को यूँ ही ।टपकने दूँ बूँदे यूँ ही ।
पर क्या हो जो टी -शर्ट चकतों से भर जाए ?
पर क्या हो जो ज़ुकाम हो जाय ?
क्या हो जो सत्यार्थ मेरे बालों से खेलने लगे ?
क्या हो जो शतेश अभी घर आ जाएँ ?
और क्या हो जो ,”मेरे बालों में बर्फ़ जम जाए”
सफ़ेद रुई से ।

Monday, 3 December 2018

पोर्ट रीको यात्रा की अंतिम और अद्भुत कड़ी !!!

पोर्ट रीको यात्रा की अंतिम और अद्भुत कड़ी ।
मैंने कभी पढ़ा था “ट्रॉपिकल रेन फ़ॉरेस्ट “ कभी पढ़ा था “बीयोलमिनेसेंस “पर इतने सालों में इनकी यादें धुँधली हो गई थी ।
जब मालूम हुआ की इस जगह पर ये दोनो हीं है ,फिर तो मेरे टॉप अट्रैक्शन में ये दोनो शामिल हो गए ।

पूरे विश्व में सिर्फ़ पाँच बीयोलमिनेसेंस है ,जिसमें तीन तो पोर्ट रीको में हीं है ।सबसे सुंदर तो पोर्ट रीको के वीकुएस आइलैंड पर है पर वहाँ रुकने का कोई ठिकाना ना मिल पाने के कारण “लाजस के बायो वे “ गए ।

*बीयोलमिनेसेंस -लाइट का प्रोडक्सन सिंगल सेल या लिविंग ऑर्गनिजम के द्वारा होता है ।जैसा कि जुगनुओं में होता है ।घुप अंधेरे में ये और भी ख़ूबसूरत दिखते है ।
हमने उस हिसाब से छुट्टी प्लान कि थी कि जब अंधरिया रात हो ।
यहाँ जाने का सबसे ज़्यादा प्रचलित तरीक़ा क्यांक है लेकिन हमलोगो ने बोट लिया था ।एक ही बोट है इस टूर के लिए “पैरडायज स्कूबा “ की ।रात के अंधेरे में हमलोग कुछ दस लोग निकले समंदर की सुंदरता देखने ।सबसे छोटा सत्यार्थ था  ।सबकी नज़र इस पर थी कि दौड़ भाग में पानी में गिर ना जाए ।सारे अनजान लोग पर ,इतना प्रेम सच में अद्भुत है ये जगह ।

कुछ आधे घंटे पैतालीस मिनट बाद हम उस जगह पर पहुँचे जहाँ ये अद्भुत नज़ारा देखना था ।पानी में हाथ या पैर डाल कर हिलाने पर लाखों बिजलियाँ चमक उठती ।मैं उस अनुभव को शब्दो में ठीक से बया नही कर सकती ।बोट के मालिक ने सबको चेतावनी दी कि पानी में ज़्यादा दूर ना जाए।मैं ,शतेश ,सत्यार्थ और बोट के मालिक के साथ उसका हेल्पर बोट पर रुक गए ।हम बोट की सीढ़ी पर बैठ बारी -बारी इसका आनंद लेते रहे । आप में ये सबसे ख़ूबसूरत चीज़ थी जो मैंने अनुभव किया ।

दूसरा “ईआई यूँकुये ट्रॉपिकल रैन फ़ॉरेस्ट “ 28000 एकड़ में फैला ये वन ,”वॉटरफ़ॉल ,तरह -तरह के पेड़ -पौधे ,जीव -जंतु से भरा है “।हेरिकेन के बाद इस वन की बहुत ज़्यादा क्षति हुई और लगभग एक चौथाई वन बंद है अभी ।साथ ही विजीटोर सेंटर भी बंद पड़ा है ।इस वन में नेट्वर्क भी नही लगता ।आप लोगों की मदद से आगे बढ़ सकते है ।साथ ही यहाँ जाने से पहले मच्छर ,किट-पतंगो से बचने वाला लोशन ज़रूर ले ।हमने वहीं के एक छोटे से दुकान से लिया ।बाक़ी आप पैदल भी इस वन को घूम सकते है अगर स्टेमीना है तो ।

लस्ट बट नोट लिस्ट,यहाँ के ऑर्ट हाउस ,म्यूसियम और कोफ़ी शॉप,और अमेरिका का दूसरा सबसे पुराना चर्च  ।हम एक  हीं म्यूसियम जा पाए “मसेओ दे लॉस” कभी ये वर्ल्ड वार दो के समय सैनिकों का ठिकाना था ,इसके एक हिस्से में उनका इलाज भी होता था ।पर इसका भी आधा हिस्सा अभी बंद था हरिकेन की तबाही के बाद ।एंट्री टिकेट पाँच डॉलर है ।निचले तले पर खाने -पीने की दुकान है ,ऊपर आपको म्यूसियम मिलेगा ।

Thursday, 29 November 2018

रुई का बोझ !!!

चंद्रकिशोर जयसवाल की उपन्यास पर एक बेहतरीन फिल्म बनी “रुई का बोझ “
फिल्म की कहानी एक बुज़ुर्ग व्यक्ति की है जो अपने परिवार से त्रस्त है ।अगर आपको ये लाइन पढ़ कर अमिताभ बच्चन की बागवान या राजेश खन्ना की अवतार की याद आ  रही है तो ,मै आपसे यही कहूँगी बस एक बार देखिये इस फिल्म को। 
जो ना देख पाए उनको लेकर चलती हूँ एक गाँव  में।इस गाँव में एक बुज़ुर्ग अपने तीन बेटों के साथ रहता है। समय के साथ बेटों का शादी -ब्याह होता है ,घर गृहस्ती से बोझ बढ़ता है और नौबत घर के बटवारे तक आ जाती है। 
घर  का बटवारा तो हो जाता है पर बुज़ुर्ग रहे किसके साथ ?तय होता है कि ,छोटे बेटे को उसकी जरुरत है तो उसके साथ रहे। 
कुछ दिनों तक तो बेटा -बहू खूब सम्मान देते है ,पर समय के साथ वो सम्मान कम होने लगता है। ऐसी स्थति में बुज़ुर्ग चिड़चिड़े से रहने लगते है।
उनकी हमउम्र का एक दोस्त उन्हें समझाता है -“बूढ़े लोग रुई के गठ्ठर के समान होते हैं। शुरू मे हल्के -फुल्के पर बाद में भींगी रुई समान भरी  इसलिए ,पारिवारिक शांति के लिए कुछ बातों को अनदेखा अनसुना करते रहना चाहिए। 
पर बुज़ुर्ग को ये बात समझ नहीं आई। उसे लगता है कि बूढ़ा हो जाने से अच्छा खाना पीना नहीं खाया जा सकता ?क्या अच्छा पहना नहीं जा सकता ?
रोज की कलह एक दिन बाप -बेटे में ऐसी नौबत ला देता है कि  बेटा क्रोध में बाप को घर के पीछे कोठरी में रहने की सजा दे देता है। इस समय फिल्म के बैकग्राउंड में जो सितार बज रहा होता है ,मानो आपके दिल को झकझोर रहा होता है। सोचिये कभी घर का मालिक और आज कोठरी में पड़ा हुआ है। 

ऐसे में बुज़ुर्ग घर छोड़ने का मन बनाता है।जंगल के मठ की ओर चल पड़ता है। घर के लोगो को अपनी गलती का अहसास हो जाता है पर ,बुज़ुर्ग रुकता नहीं है ।फिल्म का सबसे सुन्दर पार्ट यही है। बैलगाड़ी पर जाता बुज़ुर्ग ख्यालों में अपने दोस्तों से बातें करता है। 
उसका दोस्त कहता है -“कलयुग है ,पर कलयुग का ये मतलब नहीं की घर छोड़ कर भाग जाया जाय “ वापस लौट जाओ। 

बैलगाड़ी चल रही होती है ।बुज़ुर्ग गाड़ीवान से कहता है -कोकन घर से निकलते समय सोचा था अब घर नहीं लौटूँगा ,पर मैं अकेले कैसे रह पाउँगा ?सोच रहा हूँ ,दो -तीन दिन में जल चढ़ा कर लौट आऊंगा। 
गाड़ीवान कहता है -बहुत अच्छा मालिक  ।हम भी यही कहने का सोच रहे थे। 
बुज़ुर्ग गाड़ीवान को डांट लगाता है तो कहा क्यों नहीं ? अच्छी बात कहने में तुमलोग इतना सोचते क्यों हो ?
फिर कहता है कि दो -तीन दिन वहाँ क्या करूँगा ?आज शाम तक ही लौट आऊँगा और अंत में ये उसकी हालत ये होती है कि गाड़ीवान से कहता है -गाड़ी घुमा ले घर की तरफ। वहाँ जा कर मेरा मन बदल गया फिर ? बाल -बच्चों के बिना कैसे जिंदगी बिताऊंगा ।

**“गीता कनेक्शन :-
गाड़ीवान पूछता है -मालिक आप अचानक मन क्यों बदल लिए ?
बुज़ुर्ग कहते है -कोकन गीता का एक श्लोक याद आ गया ,

तुल्यनिन्दास्तुतिमोर्नी  संतुष्टो येन केनचित ।
अनिकेतः स्थिरमतिभक्तिरमान्मे प्रियो नरः ।।
 यानि ,जो निन्दा -स्तुति को सामान समझता है ,किसी भी प्रकार से शरीर निर्वाह में सदा ही संतुष्ट है और रहने के स्थान में शांत चित आसक्ति रहित है ,वो स्थिरबुद्धि मनुष्य मुझे प्रिय हैं ।

गाड़ीवान फिर पूछता है -लेकिन परमधाम का क्या मालिक ?
बुज़ुर्ग कहते है ,गीता में ही कहा गया है -

यत्सांख्ये प्राप्तये स्थानं ताद्दोगैरपि गम्यते ।
एकं सांख्यं च योगं च यः पश्यति स पश्यति ।।
यानयोगियों द्वारा जो परमधाम प्राप्त किया जाता है कर्मयोगियों को भी वही प्राप्त होता है ।इसलिए जो मनुष्य ज्ञानयोग और कर्मयोग को एक सामान देखता है वही यथार्थ देखता है ।

नोट:-क्या मैं इस दुनियाँ का अकेला हूँ जो बूढ़ा हुआ ?क्या तुम सब कभी बूढ़े नहीं होंगे ?
ध्यान दीजियेगा इस लाइन पर और साथ ही गीता श्लोक पर ।



Monday, 26 November 2018

पोर्ट रीको के ख़ूबसूरत घर !!!!!

समुद्र तटों के अलावा पोर्ट रीको का दूसरा सबसे बड़ा अट्रैक्शन यहाँ का समृद्ध इतिहास और कला है ।यहाँ के कलरफूल घर ,घरों की बालकनी में झूलते फूल ,नीले -काले पत्थरो से बनी गालियाँ ,गली -गली में रेस्ट्रोरेंट ,आर्ट शॉप,और ख़ूब सारे पेड़ -पौधे आपका हर पल मन मोहते रहते है ।
ओल्ड सैन जुआन में कई सारी चीज़ें है देखने को ।सुबह से शाम तक का वक़्त कैसे बीत जाता है आपको पता भी नही चलता ।शाम को तो और भी रौनक़ हो जाती है ।म्यूज़िक ,डान्स खाना पीना सब आपको किसी ना किसी कोने पर मिल जाएँगे ।सच में लैटिन लोगों से सीखा जा सकता है हर माहौल में ख़ुश रहने का तरीक़ा ।

सबसे पहले मैं आपको यहाँ के फ़ोर्ट लेकर चलती हूँ ।कैस्टीलो सैन क्रिस्टॉबाल 500साल पुराना किला है ।शहर को बाहरी लोगों के हमले से बचाने के लिए ,स्पेनिश लोगों ने मिलकर अटलांटिक ओसन के आगे  एक दीवार खड़ी कर दी ।छः मंज़िला ये किला बाद में नेशनल हिस्टोरिक साइट घोषित हुआ ।इसके हर कोने पर एक एक गार्ड हाउस जैसा बना है ।जिसमें 24घंटे एक गार्ड रहता निरीक्षण को कि कोई हमला करने तो नही आ रहा ।क़िले के नीचे के दो फ़्लोर बंद है ।यहाँ घूमने के लिए दोपहर के बाद जाना ठीक होगा ।कारण अक्टूबर में भी हमारा दम निकल गया था ।आपको सीढ़ियों से ही एक फ़्लोर से दूसरे तक जाना है ।दम निकलने के बाद भी आप घूमना नही छोड़ते इतना ख़ूबसूरत नज़ारा आपके आँखो के आगे होता है ।
जैसा कि मैंने पहले बताया था यहाँ घूमना सस्ता है ।इसकी एंट्री फ़ी मात्र 7डॉलर पर पर्सन ,वो भी इस चार्ज में आप दो दिन घूम सकते है ।दो दिन के साथ दो किला भी ।दूसरा किला यहाँ से लगभग 15-20मीनट वॉकिंग है ।मेरा सुझाव ये है ,अगर आप अकेले है। तो ठीक पर बच्चे के साथ पैदल ना जाए ।शतेश पहले क़िले में हीं थक गये थे ।बोले मैं नही जा रहा ।मैं सत्यार्थ को लेकर निकल पड़ी बोली आप गाड़ी पार्किंग से लेकर क़िले तक 30 मिनट के बाद पहुँचो ।तबतक यही आराम करो ।मेरी जो हालत हुई मैं हीं जानती हूँ ।क़िले का शॉर्ट कट गेट बंद था ,लम्बा घूम कर गई तो वहाँ क़रीब 25/30 सीढ़ियाँ ।मेरी हिम्मत जबाब दे गई और मैं वही बाहर बैठ कर शतेश का इंतज़ार करने लगी ।

क़िले के साथ हीं सैंटा मारिया मैग्डलेना सेमटेरी है ।इस ख़ूबसूरत सेमेटेरी को अटलांटिक ओशन के सामने बनाने का कारण मृत्यु को ख़ूबसूरत दिखाना है ,ऐसा मुझे वहाँ पर खड़े एक गाइड ने बताया ।उसने कई फ़ेमस लोगों के नाम बताए जो यहाँ दफ़न थे और मैं उन्मे से किसी को नही जानती थी ।आप इसे भीतर से भी देख सकते है पर हमारे पास समय कम था ।भीतर जाने के लिए फिर आपको लम्बा पैदल जाना होता ।वैसे आप इसे बाहर से भी अच्छी तरह देख सकते है ।इसके पीछे ग्राउंड है जहाँ लोग पतंग उड़ाने के लिए आते है ।एक छोटा सा बुक स्टोर भी है जो हेरिकेन के बाद सिमट गया है ।
वापस स्ट्रीट पर आते हैं तो एक गली में छतरी टाँग रखी है ,जहाँ फ़ोटो लेने के लिए भीड़ लगी थी ।हम भी उसका हिस्सा बन गए ।उसके आगे ही गवर्नर का महल है ।

आज के अंतिम पड़ाव में कैसे तबाही को ख़ूबसूरती में बदला जाय ये कोई ऑर्ट आउफ़ यूनाइट से सीखे।यौको में हेरिकेन के बाद बहुत से घर तबाह हुए ।कई लोगों के रोजगार बंद हो गए ।ऐसे में यहाँ पर इस ऑर्ट ग्रूप ने लोगों के घरों को ख़ूबसूरत पेंट से सज़ा दिया ।यहाँ जाने की कोई एंट्री फ़ी नही ।आप अपनी इक्षा से लोकल लोगों के घरों से कुछ खाने पीने का ख़रीद ले ।हमने एक लोकल फ़्रूट आइसक्रीम ली थी ।
चलिए आगे अब तस्वीरों के ज़रिए यात्रा पर निकलते हैं -


Sunday, 25 November 2018

ही लाफ़ड ऐट माई सीनस इन हिज़ आर्मस आई मस्ट स्टे!!!!

पिछला सप्ताह मेरे लिए एक मेंटल ट्रॉमा जैसा रहा ।कुछ तबियत ख़राब तो कुछ मन ।मन के ख़राब होने का कारण एक बहुत प्यारी दोस्त भारत वापस लौट गई ।उसके जाने से पहले हम कुछ दोस्तों ने बाहर पार्टी रखी ।बातचीत के दौरान मुझे मालूम ही नही चला कब वेटर ने वेज और नॉनवेज स्टार्टर ला दिया ।शतेश ग़लती से चिकेन 65मेरी प्लेट में परोस दिए जीवन में पहला बाइट ग्लानि से भर गया ।वेटर आकर माफ़ीपर माफ़ी माँग रहा है ।मेरी आँखो में जाने क्यों आँसू आ गए हैं।बाथरूम की तरफ़ भागती ।शतेश और वेटर पीछे आते हैं।मैंने कोई बात नही कह कर बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर लिया ।

कल हीं तो मैने “ऑन बॉडी एंड सोल “ हंगेरीयन फ़िल्म देखी थी ।कितनी निर्दयता से उसमें जानवर को काटते है ।मुझे अभी वो याद आ रहा था साथ ही ऊबकाई और रूलाई दोनो आ रही थी ।थोड़ी देर बाद मैं बाहर आई तो शतेश वहीं खड़े थे ।मेरे कुछ दोस्त भी थोड़ा आगे खाना छोड़ मेरा इंतज़ार कर रहे थे ।मुझे आते ही संतावना देने लगे ।ख़ैर उस रात मैं सो नही पाई ।

बात फ़िल्म की तो क्या कहूँ ,ऐसी फ़िल्म मैंने आज तक नही देखी थी ।ज़बरदस्त बात तो ये कि इस फ़िल्म की डिरेक्टर एक महिला हैं ।सच में एक महिला ही एक समय में इतनी क्रूर और अनंत प्रेमिका हो सकती है ।बहुत ही ख़ूबसूरती से शांत कविता की तरह इस फ़िल्म को बनाया गया है ।कई बार तो मैं डर जाती तो वही अगले पल उस हिरणी सी आँखो वाली नाईका की ऐक्टिंग में खो जाती ।बार -बार आप सपने के तिलस्म में खो से जातें हैं पर फ़िल्म अधूरा नही छोड़ पाते।
फ़िल्म कि कहानी कुछ यूँ है ,नायक और नाईका एक कसाईख़ाना में काम करते है ।दोनो ही अंतरमुखी व्यक्तित्व वाले होते है ।खास कर नाईका ।ऐसे में एक दिन उन्हें कॉम्पनी की मनोचिकित्सक द्वारा मालूम होता है की दोनो एक ही सपना देखते है।जी हाँ एक हीं सपना ।
मैंने आज तक एक बात को कई बार दो लोगों को कहते सुना है ,एक ही चीज़ सोचते भी देखा है पर एक ही सपना और वो भी रोज़ ।ये कभी नही सोचा था ।
हाँ तो ,दोनो सपने में हिरण होते है ।बर्फ़ीली वादी में एक तालाब के किनारे मिलते हैं।उन दोनो को भी इस बात पर यक़ीन नही होता ।इसलिए अगले दिन से वे आपना सपना एक पेपर पर लिख कर एक दूसरे को देते हैं।फिर उन्हें यक़ीन हो जाता है कि वे दोनो एक हीं सपना देखते है ।इस तरह रोज़ अपना सपना शेयर करने से उनके बीच प्रेम उपजने लगता है ।
नाईका जैसा कि बहुत ही अंतर्मुखी शर्मीली होती है वो नायक के प्रेम स्पर्श को एक बार नकार चुकी है ।नायक इसे अपनी ग़लती ,उम्र का फ़ासला और एक हाथ से अपाहिज होना  समझता है ।वो नाईका को अनदेखा करने लगता है ।नाईका इसे सह नही पाती है और आत्महत्या की कोशिश करती है ।

बाथटब में ख़ून और दर्द से भिंगी नाईका मौत का इंतज़ार कर रही है तभी टेप बजना बंद हो जाता है ।वो बेचैन सी टेप की तरफ़ बढ़ती है और फ़ोन की घंटी सुनाई देती है ।भाग कर वो फ़ोन के पास जाती है ।अब उसके चेहरे पर शांति है ।
मानो उस एक फ़ोन कॉल ने उसे जीवन दे दिया है ,जब नायक कहता है -मुझे नही मालूम कि मैंने तुम्हें इस वक़्त क्यों कॉल किया ।मुझे ऐसा लगा जैसे मैं मर रहा हूँ ।
फ़िल्म का सबसे डरावना ,मार्मिक ,रोमांटिक सीन यही है ।इस एक सीन में आप सब जी लेते हैं।
नायक और नाईका अंततः एक होते  है ।सपने का जादू ख़त्म हो चुका है ।अगली सुबह जब वे जागते है उन्हें याद हीं नही कि उन्होंने कोई सपना देखा हो ।

जाते- जाते
 फ़ॉरगिव मी हियर
आई कैनॉट स्टे
ही कट आउट माई टंग
देयर इस नथिंग टू से
लव मी ?
ओह लॉर्ड ही थ्रू मी अवे
ही लाफ़ड ऐट माई सीनस इन हिज़ आर्मस आई मस्ट स्टे