Friday, 10 March 2017

खेलअ जम के तू होली घूँघट वाली !!!

महिला दिवस का धूमधाम खत्म हुआ।फिर से वही महिलाओं वाले जोक मार्केट में छा गए है।महिलायें भी ऐसे मसेज पढ़ कर कभी  :) तो कभी  : p ईमोजी भेज कर मजे लेती रहती है।क्या करे आदत जो पड़ गई है ऐसे मज़ाक की।पुरुष प्रधान समाज में एक दिन महिला दिवस मनाया गया यही काफी है।इससे ज्यादा की उम्मीद आपको फेमिनिस्ट बना सकता है।छोड़िए ये सब तो चलते रहेगा ,होली का त्यौहार है इसका आनंद लीजिये।उत्तर प्रदेश में तो चुनाव के नतीजे से लगता है ,होली अब तो भगवा होगी।वही बिहार में तो महिला प्रधान गानों की बारिश हो रही होगी।आहाहा ,देवर भाभी ,जीजा -साली के गानों की धूम मची होगी।कई बार आस -पास ऐसे गाने सुनकर मैंने औरतों को मुस्कुराते देखा है।क्या सच में उन्हें अच्छा लगता है ,या फिर अपनी झेंप मिटाने के लिए हँसी का सहारा लेती है ? माना हँसी मज़ाक का त्यौहार है ,पर इस हद तक।ये तो हद ही हो जाती है।खैर महिलाओं का तो शोषण का इतिहास रहा है।इसमें नया कुछ नही है। नया है इनका लीपा पोती कर महिला ससक्तिकरण का ।अब ऐसा भी नही कि, बदलाव नही हुआ।हुआ है ,पर उम्मीद से अब भी बहुत कम।अब देखिये न त्यौहार का मतलब आज भी महिलाओं के लिए पकवान बनाना भर ही है। पुरे दिन चूल्हा -चौका करते रहो।समय निकाल कर थोड़ा सज -सँवर लो।बाद बाकी देवर ,जीजा आते होंगे ,कभी आपकी मर्जी तो कभी बिना मर्जी के रंगने के लिए ।आप बस हँसी का नकाब ओढ़े रहो।

लड़कियों के दुःख अजब होते है ,सुख उससे अज़ीब ,हॅंस रही है और काजल भीगता है साथ

बसंतपुर जहां बचपन बीता वहां, मैंने जीवन के कई रंग देखे है।आस -पड़ोस में रंग खेलने जाती तो देखती कोई देवर- भाभी से जबरदस्ती की ठिठोली कर रहा होता।हम कुछ सखियाँ इंतज़ार करते की कब वो महानुभाव जाये और हमारा नंबर आये ,भाभी को रंगने का।लड़कियों का फिर भी हाल ठीक है ,पर भाभीयों पे तो जुल्म हो जाता है।हमें देख कर भाभी ख़ुशी से खिल जाती।उस मनचले देवर से कहती- जाई राउर बहिन लोग आएल बा ,उनका से खेली होली।देवर बेचारे दांत दिखा के चल देते।शुक्र है ,ऐसे महानुभाव ना तो मेरे देवर है न भाई।वरना कांड हो गया होता। खैर उनके जाते ही वो भाभी कहती -बड़ा बदमाश लईका बानी ,पूरा कपड़ा ख़राब कर देनी। इस पर उनकी सास कहती -जाए द परब के दिन ह। देवर -भाभी के त रिवाज ह हँसी मज़ाक के। कास भाभी कह पाती-
मेरी सेज हाज़िर है
पर जूते और कमीज़ की तरह
तू अपना बदन भी उतार दे
उधर मूढ़े पर रख दे
कोई खास बात नहीं
बस अपने अपने देश का रिवाज़ है।

सासु माँ आपने तो लाड़ से कह दिया -ये घर गन्दा मत करा। होने जा भाभी रसोई में बाड़ी।क्या आपने मुझसे पूछा की, मैं कैसे रंगना गना चाहती हूँ ,किससे रंगना चाहती हूँ ? काश कोई मुझे समझ पाता ,

मेरे दिल पे हाथ रखो ,मेरी बेबसी को समझो
मैं इधर से बन रही हूँ ,मैं इधर से ढ़ह रही हूँ।
इस नारी ससक्तिकरण के दौर में कब वो दिन आएगा ,जब भाभी अपने दिल की बात कह पायेगी,या फिर मनचले देवर को पटक के रंग मल देगी। लगता है बिन पीए भांग का नशा चढ़ गया मुझे ,तभी तो बकवास कर रही हूँ।होली है, कुछ प्रेम- मोहब्बत की बातें हो तो कुछ बात हो।ये क्या बौराए जैसा बात कर रही थी अबतक।पर मैं क्या करूँ, ये मौसम ही बाँवरा कर देने वाला होता है।कभी आलस में डूबे होते है ,तो कभी प्यार में।ऐसे में जो प्रेमी अपनी प्रेमिका को रँग नही पाए होंगे।सोम रस के आभाव में भाँग का भोग लगा कर ही चैता गायेंगे।

 हीया जरत रहत दिन रैन हो रामा ,जरत रहत दिन रैन। 

चलते -चलते आप सभी को होली की रंगीन शुभकामनायें।रंग -गुलाल ना सही आपलोगों के लिए एक रंगों से सजा गीत पहुंचे। 

Tuesday, 7 March 2017

आशीर्वाद से नवाज़े !!!


 8 मार्च, ह्म्म्म ! क्या लिखूं आज के दिन ? चलिए शुरुआत सभी महिलाओं को शुभकामनायें देने से करती हूँ।सभी सखियों को महिला दिवस की ढ़ेरो शुभकामनायें।आप जैसी भी है , उम्र के जीस भी पड़ाव पर है ,या किसी भी परिस्थति में है आप बेहद शानदार है।वैसे तो भगवान ने हर एक चीज़ खूबसूरत बनाई है ,पर मुझे ऐसा लगता है कि ,महिलाओं के प्रति उनका सॉफ्ट कॉर्नर ज़्यादा रहा होगा। तभी तो इनको धैर्य ,ममता ,साहस ,बुद्धि ,सुंदरता और वाक पटुता सब कुछ से नवाज़ दिया।भगवान के बाद कोटि -कोटि प्रणाम माँ ,मुझे जन्म देने के लिए। जन्म लेना और जन्म देना दोनों अपने आप में एक जटल प्रक्रिया है ,फिर भी इसकी खूबसूरती सबसे बेमिशाल है।दोस्तों जन्म लेने का तो याद नही सिवा 8 मार्च के पर ,जन्म देने का अहसास क्या होता है ,अब मैं समझ चुकी हूँ।देखिये ना अभी मैं आपलोगों से अपने मन की बात शेयर कर रही हूँ ,और मेरा नन्हा सत्यार्थ मेरी गोद में चैन से सो रहा है।इससे सुखद अहसास क्या हो सकता है।बहुत-बहुत धन्यवाद भगवान आपका मुझे महिला बनाने के लिए।"सत्यार्थ " मेरे बेटे तुम्हे बहुत -बहुत आशिर्वाद और प्यार मुझे मातृत्व का सुख देने के लिए।विश्व में जितनी भी महियालें है ,मातायें है उनसबको मेरा कोटि -कोटि प्रणाम और शुभेक्षा ।कभी और अपने सत्यार्थ की कहानी लिखूंगी।आज बस मुझे और मेरे बच्चे सत्यार्थ को प्यार और आशीर्वाद से नवाज़े।

















Friday, 24 February 2017

खूब सारा प्यार और आशीर्वाद भाई !!!

जन्मदिन की बहुत -बहुत शुभकामनायें भाई।खूब सारा प्यार और आशीर्वाद ।हमेशा खुश रहो ,आगे बढ़ते रहो ,निडर रहो और बदमाशी करते रहो।मुझसे लड़ते रहो ,मुझे मनाते रहो।तुम्हारे जन्मदिन पर तुम्हारे हौसलों के नाम ,

आख़िरी नहीं है यह जन्म-दिन
और लड़ाई के लिए है पूरा मैदान

आज के दिन मैं लौटाना चाहता हूँ
एक उदास बच्चे की हँसी 
किसी विकलांग के पैर और 
किसान की मेहनत

आज के दिन मैं
घूमना चाहता हूँ पूरी पृथ्वी पर
एक निश्शंक मनुष्य की तरह 

आज के दिन मैं धरती को
बाँहों में भर लेना चाहता हूँ प्रेमिका की तरह और 
प्रेम करना चाहता हूँ सृस्टि की हर कृति से। 
 

Wednesday, 22 February 2017

सिर्फ प्रेम तुम्हारे लिए !!!

प्रिय शतेश ,
प्यार ,सम्मान और तुम्हारी खुशियों की कामना के साथ तुम्हे जन्मदिन की बहुत -बहुत शुभकामनायें !
तुम्हारा जन्मदिन है ,और इस बार भी मेरे पास तुम्हे देने को गिफ्ट नही है।कारण तो तुम्हे मालूम ही है।मुझे तुम्हारे ही पैसों से तुम्हे गिफ्ट देना वाज़िब नही लगता।कई बार तुम हँसते भी हो कि क्या तपस्या ,क्या मेरा क्या तुम्हारा।सब तो तुम्हारा ही है।पर मैं क्या करूँ मैं ऐसी ही हूँ।थोड़ी पागल।सोचो ज़रा तुम्हारे साथ ही जाकर ,तुम्हारी ही जेब पर डांका डाल कर ,तुम्हारे लिए गिफ्ट लेकर आऊँ।फिर झूठमुठ का इठलाते हुए तुम्हे गिफ्ट दूँ।मुझे तो सोच कर ही अजीब लग रहा है।खैर इसमें कोई बुराई नही ,फिर भी मैं इस बात के लिए सहज नही हो पाती।कल तुमने कहा था , तपस्या तुमने मुझे सबसे अनमोल गिफ्ट दिया है -"सत्यार्थ"।लेकिन शतेश ,सत्यार्थ कैसे किसी का गिफ्ट हो सकता है ? वो तो हम दोनों का सच है ,हम दोनों है ,हम है।हाँ प्रेम एक तोहफ़ा हो सकता है भावनात्मक रूप से।मेरी तरफ से एक गिफ्ट हमेशा -हमेशा तुम्हारे पास होगा ,चाहे जन्मदिन हो ,होली हो ,दिवाली हो ,ईद हो , क्रिसमस हो या फिर शादी की सालगिरह -वो है "मेरा प्यार "
हाँ ये भी कर सकती हूँ ,आज के दिन तुम्हे दिनभर पुराने टेस्ट मैच देखने या फिर न्यूज़ पढ़ने की छूट जरूर दे सकती हूँ।मै बिल्कुल इर्रीटेट नही होउंगी।अरे पुराने मैच क्यों ?आज से तो इंडिया और ऑस्ट्रेलिया का टेस्ट मैच शुरू है।तुम्हारी तो चाँदी हो गई।साथ ही आज कुछ तुम्हारी पसंद का लिखती हूँ।
आज की सनसनी ख़बर -शतेश नाम का एक युवक बिहार के एक छोटे से गाँव से निकल कर अमेरिका तक पहुँचा।ये सफर इतना आसान नही था।इस सफर तक पहुँचने में शतेश जी की माता जी का विशेष योगदान रहा है।ताज़ा जानकारी के मुताबिक अमेरिका में ट्रम्प के शासनकाल में जनता बऊराई हुई है।हर तरफ कुछ न कुछ अफवाहों का दौर चल रहा है।इसके बावजूद तमाम भारतीयों के साथ बिहार का ये लाल भी अमेरिका में डाटा हुआ है।अब देखना ये है कि आगे बढ़ने के मजबूत इरादे जीतते है या फिर नए बदलते माप दंड। क्या भारत का मोह शतेश को वापस ला पायेगा ? जानने के लिए देखते रहिये ,धुआँधार  न्यूज़।एक छोटा सा ब्रेक लेते है।ब्रेक के बाद जानेगे ,क्या है गुजरात के गदहों की कहानी , जायज़ पत्नी होने की होड़ मची अमेठी राजभवन में और बिहार में सेक्स रैकेट चलाता था एक कांग्रेसी नेता।पत्रकार रविस के भाई होने की पुष्टि। ताज़ा ,चटपटे अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहिए।ब्रेक -
मुझे मालूम है तुम्हे हँसी आ रही होगी मेरी खबरों के ख़जाने को पढ़ कर।आगे पढ़ो अपनी प्रेम कहानी क्रिकेट की ज़ुबानी-
मैदान सीसीडी साकेत ,प्लेयर शतेश और तपस्या ,अम्पायर उज्जवल कुमार।दोनों खिलाडी मैदान में टॉस का समय अब देखना ये है कि, टॉस कौन जीतता है।अम्पायर बातों का सिक्का उछालता है और ये शतेश ने टॉस जीत लिया।देखना ये है कि किसकी जीत होती है ? मैच के पहले दिन ही शतेश ,तपस्या के द्वारा बोल्ड हो जाते है।दूसरे दिन मैच जयमाला के साथ आगे बढ़ता है।युवा खिलाड़ियों से घिरे शतेश ,तपस्या से आँख मिलाते है।दोनों खिलाडी आमने -सामने।माला डाल कर एक रन बनाने का मौका तपस्या छोड़ना नही चाहती।और ये मौके का फायदा बखूबी उठाते हुए तपस्या ने एक रन लिया।शादी के फेरो के साथ तपस्या धीरे -धीरे रन बनना शुरू करती है।तपस्या के कुल 4 रन बने।मैच समय के आभाव में तेजी से बढ़ता हुआ।ओहो! पर ये क्या, हिट विकेट और इसी के साथ तपस्या आउट हुई।अब देखना ये है कि ,शतेश क्या कमाल करते है।फेरों के साथ शतेश 3 रन बना चुके है।चौथे फेरे के साथ शतेश ने एक और रन जोड़ा।दोनों खिलाडी के स्कोर बराबर।अब सिर्फ एक गेंद बची है।देखना ये है कि मैच किस नतीजे पे पहुँचता है? दर्शक बाराती एक्ससाइटेड है।पंडित जी कॉमेन्ट्री कर रहे है।दोनों खिलाड़ी घबराये हुए।इस मैच पे दोनों के आगे का भविष्य निधारित है।कन्यादान तक स्थिती गंभीर बन चुकी है।मैच देख रही महिलायें दारुन गीत गाने लगी है।खिलाडी शतेश थोड़े घबड़ाये गेम जीतने की कोसिस में।मैच रोमांचक मोड़ पर पहुँच चूका है।समय बहुत कम बचा है ,सिंदूर दान का बेहतरीन मौका तपस्या ने जाने नही दिया। एक शानदार सिंदूर कैच कर के शतेश को कैच आउट किया।और इसी के साथ दर्शक बारातियों में ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी।मैच टाई हो गया।दोनो खिलाड़ी कोहबर घर में देवताओं से ,बड़ो से आशीर्वाद रूपी ट्रॉफी ले रहे है।इस तरह आज एक रोमांचक मैच देखने को मिला।खिलाड़ियो के साथ दर्शको ने भी खूब लुत्फ़ उठाया।
इस तरह शतेश ,क्रिकेट रूपी हमारा विवाह संपन्न हुआ।बोलो ॐ गणेशाय नमः।
उम्मीद है तुम्हे पसंद आई होगी ,मेरा कलम रूपी प्रेम।हमेशा खुश रहो ,प्रेम में रहो।

Sunday, 12 February 2017

चिरकुट प्रेम !!!

रोज़ डे के गुजरने के बाद मुझे गुलाबों की एक कहानी याद आई।बात तब की है जब मैं दसवीं पास करने के बाद पटना पढ़ने गई थी। हुआ यूँ कि कॉलेज के हॉस्टल में जगह ना मिलने के कारण, मुझे मेरी माँ के एक ऑफिस स्टाफ के यहाँ रहना पड़ा।वैसे तो बाहर कई प्राइवेट हॉस्टल थे ,पर मैं और माँ दोनों ही डर रहे थे। मैं पहली बार घर से दूर अकेली रहने आई थी। उस वक़्त मेरे घर पर फ़ोन भी नही था। माँ को लगा मेरा हाल -चाल उसे अंकल द्वारा मिलते रहेगा साथ ही ,मेरा उनके परिवार के साथ मन भी लग जायेगा।प्लस पॉइंट ये की गार्जियन के साथ मुझे घर का बना खाना भी मिल जायेगा।तो तय हुआ हर महीने माँ उनको मेरे खर्च के अलावा एक्स्ट्रा पैसे भेजेगी।रहने खाने के तौर पर।माने एक तरह से पी जी कह ले।अंकल - ऑन्टी तो मना कर रहे थे ,पर माँ नही मानी।आखिर कर उनलोगों को माँ की बात माननी पड़ी।वैसे उस परिवार से मुझे घर जैसा ही प्रेम मिला। उन अंकल की बेटियां मेरी दोस्त बन गई।आंटी दिन भर अपने बच्चों के साथ मेरे पीछे भी लगी रहती ,पढ़ लो पढ़ लो कहती हुई।उनकी दो बेटी है। बड़ी बेटी मेरे क्लास में ही थी।लम्बाई में थोड़ी बड़ी दिखने की वजह से मैं उन्हें दीदी कहती थी। उनके कुछ दोस्त उसी मोहल्ले के थे ,जो मुझसे बात करना चाहते।पर मैं शुरू से थोड़ी अजीब रही हूँ।मुझे ये सब थोड़ा लेट समझ आता।आप सब समझ रहे है ना -माने प्यार ,मोहब्बत,टाइम पास। अब तो खैर मैं एक्सपर्ट हो गई हूँ।बाकि प्रेम की देवी की मुझ पर असीम कृपा रही है।मज़ाल है कि ,जिसपे भी मेरा क्रश -क्रूस हुआ हो ,वो मुझे पसंद ना करे।पर सच कहूँ दोस्तों ,वैलेंटाइन देवता की कसम कभी इस बात का घमंड नही किया मैंने। खैर विषय से ना भटकते हुए मुद्दे पर आती हूँ।दीदी का एक दोस्त रोज मुझे आते -जाते दिख जाता।बात करने की कोशिस करता ,पर मेरा धांसू आटिट्यूड आड़े आ जाता।फिर उसने दीदी से बात की।दीदी ने मुझसे कहा कितनी बार कह चुकी हूँ तपस्या ,वो तुमको पसंद करता है। एक बार मिल कर बात कर लोगी तो क्या होगा ?मिल कर मना कर देना। अब मैं ठहरी बसंतपुर की लड़की।ये सब हमलोगों के लिए पाप था ,बुरा काम था तब। फिर भी बार -बार कहने पर एक दिन मैंने मिलने के लिए हाँ कह दिया।मैंने दीदी को कहा मैं कही जाऊंगी नही।बोलो कॉलेज के बाहर ही मिल ले।अगले दिन कॉलेज से बाहर जैसे मैं आई वो लड़का बाहर खड़ा था।मैं सोच रही थी कि ,बात करू या ना इतने में वो पास आ गया। हाल -चाल के बाद उसने एक प्लास्टिक का गुलाब साथ में आर्चीज़ का कार्ड दिखाया। फिर हँसते हुए बोला -प्लास्टिक का रोज़ इसलिए कि तुम फेको तो टूटे ना या फिर रखो तो हमेशा तुम्हारे साथ रहे।मुझे मालूम है फूल तुम्हे बहुत पसंद है।मैं उन चीज़ों को लिए बिना सोच रही थी कि ,क्या बोलू ? तभी उसने कोई शेर बोलना शरू किया।भगवान ये लड़को को इतने डायलॉग ,शेरो -शायरी कहाँ से आती है ? उन दिनों तो मेरा शेरो -शायरी से दूर -दूर तक कोई लेना -देना नही था। मैं ईधर -उधर देख रही थी की ,साइकिल पर एक क्लास का लड़का आता दिखाई दिया।उसका घर पर भी आना -जाना था।उसे देख कर मुझे कुछ समझ में नही आया।मुझे लगा इसे मालूम हुआ तो बड़ी बदनामी होगी।साला नाम कभी हुआ नही ,बदनामी की चिंता ज्यादा रहती है।खैर वो शेर पढ़ने में मशगूल रहा।मैंने फाटक से फ्रैक्शन ऑफ़ मिनट में फ्लावर और कार्ड उसके हाथ से लगभग छीनते हुए ,अपने प्लास्टिक की प्रक्टिकल फाइल में रख लिया। वो कुछ समझता ,तबतक वो साइकिल वाला लड़का आके मुझसे पूछता है -तपस्या क्या कर रही हो? ये कौन है ?उसको लगा ये लड़का मुझे छेड़ रहा है। मैंने कहा ये दीदी का दोस्त है।साइकिल वाला लड़का मुझे घर जाने को बोल कर निकल गया।मैं भी बिना कुछ बोले घर की और चल पड़ी।पीछे से शायर लड़का दौड़ता हुआ आया ,बोला फिर कब मिलोगी तपस्या ? मैंने कहा कभी नही।घर आकर मैंने दीदी को सारी बात बताई।वो हँस रही थी।तबतक साइकिल वाले लड़के ने घर तक ख़बर पहुँचा दी थी।आज तो वो बड़ा आदमी बन गया है ,पर तभी मैंने और दीदी ने उसे खूब गालियां दी थी।उसके बाद शायर लड़के के दीदी को बार -बार कहने पर भी ,दुबारा मैं उससे कभी नही मिली।दीदी ने भी कहना बंद कर दिया।वो मुझे देखता रहा और हर बार मुझे अपने फ्लावर और कार्ड छीनने पर शर्म आती रही।एक साल बाद फाइनल इम्तहान हुआ और मैं वापस बसंतपुर आ गई। अब तो सोच के हँसी आती है।उस वक़्त आर्चीज़ कार्ड पर प्रेम छोटे -छोटे बच्चो के रूप में दिखाया जाता था।जैसे पुराने फिल्मो में फूलों का टकराना प्रेम होता हा-हा -हा। सच में ऐसा ही होता है चिरकुट प्रेम !

Tuesday, 7 February 2017

हाय रे नीतीसवा !!!

हो का रहल बा भाई बिहार में ? शराब बंदी की हवा चल रही है ,इसी में किसी ने फेसबुक पर न्यूज़ शेयर किया की -भोजपुरी अश्लील गानो पर भी रोक होने जा रही है। खबर कितनी सच्ची है मालूम नही ,पर हम तो यही सोच रहे है बिना रास -रंग के कैसा होगा बिहार। इसपे भारी जुल्म कि फगुआ भी आ गया।अब जे है सो ठीक है।हमको तो बस इस बात का दुःख है ,अब जब बसंतपुर जायेंगे तो शाम को दारू पी कर सड़क पर कोई गिरा हुआ नही होगा।देर रात कोई गीत ना गाता होगा ,गाली न दे रहा होगा।बेचारे ठेला वाले , ट्रैक्टर वाले,पान की गुमटी वाले सब मोहम्मद अजीज़ के पीछे पड़ जायेंगे।साला सारा रंग ही ख़त्म हो जायेगा।ओह ,पान से याद आया वो तो नीतीसवा ने खैनी और ज़र्दा वाला पान नही बंद किया वरना ,हाहाकार मच जाता। खून की होली हो जाती इस फागुन में।खैर बाकी बिहार का हम क्या जाने ,पर हाय रे बसंतपुर !अब तो तुमसे बसंत ही गायब हो जायेगा।इस रास -रँग के हल्ला के बीच मुझे एक भोजपुरी गाना सुनने को मिला।ये किसी शराब प्रेमी का भी गीत हो सकता है जो अपनी प्रेमिका (शराब )से दूर होने के दुःख में गा रहा होगा 😊कभी इस धुन पर कोई भक्ति गीत या शायद भरत शर्मा जी का कोई गीत सुना था ,जो अभी याद तो नही ,पर ये गीत भी सुनने लायक है।

Tuesday, 31 January 2017

शुभ की शुरूआत माता सरस्वती के साथ !!!!

पीले सरसों ,गुनगुनी धूप,और नए मौसम का आगमन। 
पीले कपड़े, पीली चूड़ियाँ, पीली सिंदूर से सजी महिलाएँ बसंत के स्वागत में खिली सी। गुलाल उड़ाते लोग, शुभ काम की शुरुआत, ओम के साथ अक्षर ज्ञान आरंभ और बेटी -बहु की विदाई। यह सब नजारा माता सरस्वती के आगमन और उनके आशीर्वाद की तैयारी का है।

अमेरिका में क्या सरसों, क्या गुलाल क्या क्या बसंत… बेटी विदा हो के यूँ आई की माँ बेचारी सगुन-संदेश भी नहीं पीठा पाती। पहनी ही पीली चूड़ियाँ पहन कर इस बार भी बसंत का स्वागत करूँगी, प्रिय माता जो पधार रहीं हैं। 
द्वार पर गेंदे के दो-चार फूल मुस्काने लगे हैं। बेटा हाथ में झाल, डमरू लेकर ठोकता-बजाता रहता है। मन बरसों से सितार की तरफ़ भागता है पर परदेश में सितार और संगीत दोनों मिल का पत्थर हैं। 

परदेश के सुख बहुत हैं पर ऋतुओं का सम्मोहन भारत में ही हैं। खेतों में पसरी सरसों मानों धरती हल्दी लगाये सगुन के इंतज़ार में हो। चने और मटर की छिम्मियाँ और हल्के सफेद-बैगनी,गुलाबी फूल मन को मिठास से भर जातें। माता के चरणों से उड़ते गुलाल सारे वातावरण को गुलाबी कर देते की इसी बीच किसी मीठे कंठ से सरस्वती वंदना फूट पड़ती;
हे माता सरस्वती शारदाविद्या दानी, दयानी, दुःख हरिणी,जगत जननी, ज्वालामुखीमाता सरस्वती शारदा
कीजे सुदृष्टिसेवक जान अपना इतना वरदान दीजेतान, ताल, और अलाप, बुद्धि अलंकार शारदाहे माता सरस्वती शारदा



 पूजा में जब घर गई थी ,तब माहौल सरस्वती पूजा का कम दिखावा का ज्यादा लगा।पूजा के नाम पर साउंड बॉक्स से जय श्री राम ,जय श्री राम नाम की चीख कान फाड़ रहे थे।किसी महान गायक ने सिर्फ "श्री राम "नाम के चिल्लाने की कैसट बनाई है ,जो मार्किट में खूब चल भी रहा है।मैंने अपने मुहल्ले के एक लड़के से पूछा ये क्या भजन है ?वो बोला दीदी ये सब मुस्लमान लोगो को चिढ़ाने के लिए हर जगह बजाया जा रहा है।मैंने उसे समझाने की कोशिस की।बाद बाकी मुझे मालूम नही मालूम उसने कितना समझा या उस बच्चे के मन में ऐसी भावनाये भरता कौन है। खैर पंडाल में पूजा के बाद बच्चे गायब थे।बस सरस्वती माँ की मूर्ति और कुछ पूजा सामग्री बिखरी हुई थी।माँ के चरणों में कुछ किताबे रखी हुई थी।किताबो से याद आया ,बचपन में मै और मेरा भाई जब सरस्वती पूजा करते थे ,हमलोग अपने लगभग सारी किताब सरस्वती माँ की चरणों में रख देते।इसके दो कारण रहे -एक तो जो भी किताब रखो माँ सरस्वती उसका सारा ज्ञान दे देंगी और दूसरा विसर्जन तक पढ़ना ना पड़े।ज्ञान तो बीना पढ़े मिलता नही था ,हाँ दो दिनों की किताबो से छुट्टी जरूर मिल जाती थी।वही माँ कहती की ,आज जो पढ़ोगे वो सारा याद हो जायेगा।अब मालूम नही ये हकीक़त है या माँ का हमें पढ़ाने पर मजबूर करने का तरीका।दूसरे दिन माँ सरस्वती की विदाई के वक्त सारी औरतें उन्हें खोइछा (चावल ,हल्दी ,दुभ ,फूल ,पैसे )देती और फिर माँ की विदाई हो जाती।माहौल ऐसा होता मानो घर से मिट्टी की मूरत नही बेटी जा रही हो। हम बच्चे विसर्जस के समय माँ सरस्वती की जयघोष करते -माँ सरस्वती भूल ना जाना अगले बरस तुम जल्दी आना 😊इसी के साथ आप सबको वसंत पंचमी की बहुत बहुत शुभकामनाये। माता सरस्वती सबको स्वस्थ दिमाग का मालिक बनाये। ज्ञान का प्रकाश विश्व में फैलता रहे।माता सरस्वती के चरणों में मेरा वंदन !